मुझे लड़का नहीं बनना,
मुझे बस अपना होना है,
जो धड़कन मेरे सीने में है,
उसे अपने सुर में पिरोना है।
क्यों हर बार कोई कह देता है,
“अगर लड़का होती तो अच्छा था”,
क्या मेरी मुस्कान कम चमकती है,
क्या मेरा सपना कुछ छोटा था?
मैंने भी तो आसमान देखा है,
मैंने भी ऊँची उड़ानें माँगी हैं,
मेरे हाथों ने भी मेहनत की है,
मेरी आँखों ने भी कहानियाँ जानी हैं।
मुझे लड़का नहीं बनना,
मुझे अपने रास्ते चुनने हैं,
जो फूल मेरे मन में खिलते हैं,
उन्हें बिना डर के बुनने हैं।
मैं गुड़ियों से खेलूँ या किताबों से,
यह फ़ैसला मेरा होना चाहिए,
मैं खेल के मैदान में दौड़ूँ,
या कविता में खो जाऊँ,
हर सपना मेरा होना चाहिए।
क्यों साहस को लड़कों से जोड़ते हो,
और कोमलता को लड़कियों से?
नदियाँ भी तो कोमल लगती हैं,
फिर भी पहाड़ों को काट देती हैं।
मैं भी नदी की तरह बह सकती हूँ,
मैं भी तूफ़ानों से लड़ सकती हूँ,
मेरी चुप्पी को कमजोरी समझने वालों,
मैं शब्दों से दुनिया बदल सकती हूँ।
मुझे लड़का नहीं बनना,
ताकि कोई मुझे सम्मान दे,
सम्मान तो इंसान का होना चाहिए,
न कि उसके नाम या पहचान का।
मैं जब हँसती हूँ,
तो मौसम महक उठते हैं,
मैं जब रोती हूँ,
तो बादल भी भीग उठते हैं।
मेरी भावनाएँ कोई बोझ नहीं,
यही तो मेरे जीने का प्रमाण हैं।
मैं माँ की ममता भी बन सकती हूँ,
मैं पिता का अभिमान भी,
मैं बहन की हँसी भी बन सकती हूँ,
मैं अपने सपनों की उड़ान भी।
मुझे तलवार नहीं बनना,
अगर मैं दीपक बन सकती हूँ,
मुझे शोर नहीं बनना,
अगर मैं एक मधुर गीत बन सकती हूँ।
लोग कहते हैं दुनिया कठिन है,
हाँ, शायद यह सच होगा,
पर कठिन राहों पर चलने के लिए
लड़का होना कब ज़रूरी होगा?
मेरे कदम भी थकते नहीं,
मेरे हौसले भी झुकते नहीं,
मैं गिरकर फिर उठ सकती हूँ,
मेरे सपने कभी रुकते नहीं।
मुझे लड़का नहीं बनना,
क्योंकि मैं किसी से कम नहीं हूँ,
मेरे होने की अपनी सुंदरता है,
मैं किसी और का भ्रम नहीं हूँ।
मैं अपने रंगों से दुनिया रंगूँगी,
अपने शब्दों से गीत लिखूँगी,
जो दीवारें राह में आएँगी,
मैं उनसे आगे निकल जाऊँगी।
मुझे लड़का नहीं बनना,
मुझे लड़की होने पर गर्व है,
मेरी पहचान मेरा साहस है,
मेरा अस्तित्व ही मेरा पर्व है।
और जिस दिन दुनिया समझेगी
कि सपनों का कोई लिंग नहीं होता,
उस दिन हर बच्चा मुस्कुराकर कहेगा—
“मुझे किसी और जैसा नहीं बनना,
मुझे बस खुद जैसा होना है।”
मुझे लड़का नहीं बनना,
मुझे खुद की कहानी लिखनी है,
अपने नाम से, अपने कर्मों से,
एक नई दुनिया रचनी है।
जहाँ कोई यह न पूछे कभी—
“लड़का या लड़की?”
बस इतना पूछे—
“तुम्हारा सपना क्या है?”।
