Poetry

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रोटी बनाने से ज़्यादा ज़रूरी

कहते हैं,लड़की को रोटी बनानी आनी चाहिए,मैं कहती हूँ—उसे रोटी कमानी भी आनी चाहिए।क्योंकि चूल्हे की आग सेसिर्फ खाना पकता

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मैं अपनी पहचान लिखना चाहती हूँ

मैं उड़ना चाहती हूँ,उन परिंदों की तरह,जिन्हें आसमान सेइजाज़त नहीं लेनी पड़ती।मैं जीना चाहती हूँ,अपने फैसलों के साथ,बिना किसी डर

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